
रायपुर – छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को सक्ती जिले के वेदांता संयंत्र हादसे का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने प्रदेश के उद्योगों में हुई दुर्घटनाओं, सेफ्टी ऑडिट और दोषियों पर हुई कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
महंत ने कहा कि सक्ती के वेदांता संयंत्र में हुए हादसे में 25 लोगों की मौत हुई, जबकि 7 लोग अब भी घायल हैं। उन्होंने पूछा कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई और मामले की विवेचना किस स्तर तक पहुंची। उन्होंने यह भी सवाल किया कि कंपनी के निदेशक अनिल अग्रवाल के खिलाफ दर्ज एफआईआर के बाद क्या उनसे पूछताछ के लिए कोई इंग्लैंड गया है।
जवाब में उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने बताया कि प्रदेश में 5 औद्योगिक दुर्घटनाएं हुई हैं और सभी मामलों में सेफ्टी ऑडिट कराया गया है। उन्होंने कहा कि वेदांता लिमिटेड, सिंघिताराई मामले में अरुण मिश्रा, योगेंद्र पटेल सहित कंपनी के निदेशक अनिल अग्रवाल और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। विभाग ने श्रम न्यायालय में भी याचिका दायर की है और पुलिस जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूछा कि क्या भविष्य में भी ऐसी घटनाओं में सभी निदेशकों पर इसी तरह कार्रवाई होगी या यह कार्रवाई केवल इसी मामले तक सीमित रहेगी। इस पर मंत्री देवांगन ने कहा कि कानून में जैसा प्रावधान होगा, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।इस दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि किसी व्यक्ति विशेष का नाम लेकर सदन में कार्रवाई की मांग नहीं की जा सकती। उन्होंने सवाल उठाया कि कहीं किसी पर दबाव बनाकर फैक्ट्री बिकवाने की मंशा तो नहीं है।
इस पर भूपेश बघेल ने सरकार पर अनिल अग्रवाल को संरक्षण देने का आरोप लगाया और कहा कि यदि सरकार गंभीर है तो उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया क्यों नहीं जा रहा। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक, नारेबाजी और हंगामा हुआ। अंततः विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन (वॉकआउट) कर दिया।




