NMDC के लाल पानी से गांव बेहाल! बोतल में ‘लाल पानी’ लेकर कलेक्टर से मिलने पहुंचे ग्रामीण

दंतेवाड़ा। दशकों से लाल पानी की समस्या झेल रहे आयरन हिल के नीचे बसे गांवों के ग्रामीण अब अपनी परेशानी की बोतल लेकर प्रशासन के दरवाजे पर पहुंचे हैं। बीजापुर जिले के गमपुर, डोडी तुमनार, तामोड़ी, पुरंगेल समेत करीब आधा दर्जन गांवों के ग्रामीण बोतल में लाल पानी लेकर दंतेवाड़ा कलेक्टोरेट पहुंचे, लेकिन कलेक्टर से मुलाकात नहीं हो सकी। मायूस ग्रामीणों को वापस गांव लौटना पड़ा।
ग्रामीणों का आरोप है कि बचेली और किरंदुल क्षेत्र में NMDC के लौह अयस्क खनन से निकलने वाला आयरन ओर डस्ट मिश्रित पानी बारिश और बहाव के साथ आयरन हिल के नीचे बसे गांवों तक पहुंचता है। ग्रामीणों के मुताबिक यही लाल पानी उनके खेतों और आसपास के जलस्रोतों को प्रभावित कर रहा है।

खेतों में लाल पानी, खेती हुई मुश्किलग्रामीणों का कहना है कि लाल पानी और आयरन ओर डस्ट की समस्या कोई नई नहीं है। कई दशकों से वे इसका दंश झेल रहे हैं। उनके अनुसार खेतों में लाल पानी पहुंचने से जमीन प्रभावित हुई है और कई जगहों पर खेती करना मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि खेतों के साथ-साथ मवेशी भी इस लाल पानी के संपर्क में आते हैं। उनका कहना है कि खनन क्षेत्र के नीचे बसे होने की वजह से उन्हें इसकी कीमत लगातार चुकानी पड़ रही है।
पीने के पानी के लिए भी जुगाड़ का सहारा
सबसे गंभीर स्थिति गांवों में स्वच्छ पेयजल को लेकर बताई जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक उनके पास सालभर पीने के साफ पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। कई ग्रामीण नाले के किनारे जुगाड़ से कुआं बनाकर उसी पानी का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।ग्रामीणों का दावा है कि दूषित पानी के इस्तेमाल से संक्रमण और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ रही हैं। हालांकि, इन स्वास्थ्य दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों का सवाल- विकास की कीमत आखिर हम क्यों चुकाएं?
कलेक्टोरेट पहुंचे ग्रामीणों ने सरकार और NMDC की खनन गतिविधियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें विकास के नाम पर ‘लाल पानी की सौगात’ मिली है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनके खेत बर्बाद हो रहे हैं, लेकिन गांवों में बुनियादी सुविधाएं तक पर्याप्त नहीं हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में सड़क, स्वच्छ पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। ऐसे में उनका सवाल है कि अगर क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों से देश और प्रदेश को विकास मिल रहा है, तो आयरन हिल के नीचे बसे ग्रामीणों को साफ पानी और सुरक्षित जीवन क्यों नहीं मिल पा रहा है?
बोतल में भरकर लाए अपनी परेशानी
ग्रामीणों का कलेक्टोरेट तक लाल पानी की बोतल लेकर पहुंचना अपने आप में प्रशासन और खनन व्यवस्था के लिए बड़ा सवाल है। वे चाहते थे कि प्रशासन उनके गांवों की जमीनी हकीकत देखे और लाल पानी की समस्या का स्थायी समाधान निकाले। लेकिन कलेक्टर से मुलाकात नहीं हो पाने के कारण ग्रामीण निराश होकर वापस लौट गए।अब देखना होगा कि ग्रामीणों की इस शिकायत पर प्रशासन लाल पानी के स्रोत, पानी की गुणवत्ता, खेतों पर पड़ रहे प्रभाव और खनन गतिविधियों से इसके संबंध की वैज्ञानिक जांच कराता है या नहीं।



