गृहमंत्री अमित शाह का छत्तीसगढ़ दौरा, बस्तर पंडुम के समापन में होंगे शामिल, नक्सलवाद खात्मे को लेकर लेंगे उच्चस्तरीय बैठक

रायपुर। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 7 फरवरी की रात छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुंचेंगे। वे 8 फरवरी को गृहमंत्री अमित शाह रायपुर में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे। इस बैठक में प्रदेश में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर अब तक की कार्रवाई, सुरक्षा अभियानों की प्रगति और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। बैठक में राज्य के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहेंगे।
समीक्षा बैठक के बाद गृहमंत्री अमित शाह बस्तर रवाना होंगे, जहां वे बस्तर पंडुम महोत्सव में शामिल होंगे। बस्तर पंडुम महोत्सव आदिवासी संस्कृति, परंपरा और लोककलाओं का प्रमुख आयोजन माना जाता है।गृहमंत्री के इस दौरे को छत्तीसगढ़ में सुरक्षा और विकास दोनों दृष्टिकोण से अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, स्थिरता और विकास को लेकर केंद्र सरकार की रणनीति को इस दौरे के दौरान और मजबूती मिलेगी।
31 मार्च तक नक्सलवाद खत्म करने की अंतिम डेडलाइन, उससे पहले अमित शाह की बैठक बेहद अहम
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। केंद्र सरकार की ओर से 31 मार्च को नक्सलवाद के खात्मे की अंतिम डेडलाइन तय की गई है। इसी कड़ी में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का छत्तीसगढ़ दौरा और 8 फरवरी को होने वाली उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है।
गृहमंत्री अमित शाह 7 फरवरी की रात रायपुर पहुंचेंगे और अगले दिन राज्य के शीर्ष प्रशासनिक व सुरक्षा अधिकारियों के साथ नक्सल विरोधी अभियानों की व्यापक समीक्षा करेंगे। बैठक में नक्सल प्रभावित जिलों में चल रहे ऑपरेशनों, इंटेलिजेंस इनपुट, फोर्स की तैनाती और तकनीकी संसाधनों की समीक्षा के साथ आगे की फाइनल स्ट्रैटेजी तय की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार यह बैठक नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है। सरकार का फोकस अब केवल नियंत्रण नहीं, बल्कि नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन पर है। सुरक्षा एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि 31 मार्च से पहले नक्सली नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ दिया जाए।
बैठक के बाद गृहमंत्री अमित शाह बस्तर रवाना होंगे, जहां वे बस्तर पंडुम महोत्सव में शामिल होंगे। इसे सरकार की ओर से यह संदेश माना जा रहा है कि बस्तर अब डर और हिंसा से निकलकर संस्कृति, विकास और शांति के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।
राजनीतिक और सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह समीक्षा बैठक नक्सलियों की ताबूत पर अंतिम कील ठोकने की तैयारी का संकेत है। अगर रणनीति के अनुसार कार्रवाई होती है, तो आने वाले महीनों में छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त राज्य बनने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा सकता है।



