
रायपुर। छत्तीसगढ़ में पहली हॉकी लीग शुरू होने जा रही है। यह महज एक नई खेल प्रतियोगिता की शुरुआत नहीं, बल्कि उस प्रदेश की हॉकी विरासत को नई ऊंचाई देने की कोशिश है, जिसे ‘हॉकी की नर्सरी’ कहा जाता है। इस नर्सरी ने देश को ओलंपियन दिए, भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ी दिए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले कई सितारे दिए।
CGBulletin.com विशेष में आज बात उस विरासत की, जिसकी जड़ें आजादी के पहले के दौर तक जाती हैं और जिसकी एक यादगार कड़ी महान हॉकी जादूगर मेजर ध्यानचंद से भी जुड़ी है।

ध्यानचंद जब पहुंचे थे राजनांदगांव…
साल 1970 के आसपास मेजर ध्यानचंद राजनांदगांव पहुंचे थे। अखिल भारतीय हॉकी प्रतियोगिता के दौरान हॉकी के इस महान खिलाड़ी के राजनांदगांव आने की याद आज भी शहर के खेल इतिहास में खास स्थान रखती है। उस दौर की एक तस्वीर आज भी इस गौरवशाली इतिहास की गवाही देती है। तस्वीर में मेजर ध्यानचंद के साथ राजनांदगांव के ओलंपियन एयरमेन बेस्टियन और हॉकी कोच भूषणलाला स्वर्णकार नजर आते हैं।

ध्यानचंद के कदम जिस शहर की हॉकी जमीन पर पड़े, उसी जमीन ने आगे चलकर देश को ओलंपिक खिलाड़ी दिए। यही वह विरासत है, जिसके कारण राजनांदगांव को लंबे समय से हॉकी की नर्सरी के रूप में पहचान मिली।
खास बात यह है कि प्रतिमा में मेजर ध्यानचंद के साथ राजनांदगांव के दो प्रमुख हॉकी चेहरों एयरमेन बेस्टियन और रामनारायण पटेल को भी स्थान दिया गया है। एक ही स्थान पर खड़ी ये प्रतिमाएं राजनांदगांव की हॉकी यात्रा की तीन पीढ़ियों की कहानी कहती हैं.
महान हॉकी जादूगर, ओलंपियन और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बेस्टियन…
छत्तीसगढ़ का पहला ओलंपिक चेहरा – छत्तीसगढ़ की हॉकी कहानी में एयरमेन रॉक बेस्टियन का नाम सबसे खास है। राजनांदगांव के इस खिलाड़ी ने 1960 के रोम ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व किया और रजत पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे। गेंद को तेजी से नियंत्रित करने और विपक्षी खिलाड़ियों को पीछे छोड़ने की उनकी क्षमता ने उन्हें अलग पहचान दी। बेस्टियन ने 151 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 59 गोल किए। 1962 के जकार्ता एशियन गेम्स में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया। वे छत्तीसगढ़ क्षेत्र से ओलंपिक तक पहुंचने वाले शुरुआती और सबसे बड़े हॉकी चेहरों में शामिल रहे।
फिर आई रेणुका यादव की बारी…

राजनांदगांव की हॉकी परंपरा ने पुरुष खिलाड़ियों के साथ महिला हॉकी को भी नई पहचान दी। रेणुका यादव ने 2016 के रियो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व किया।वे छत्तीसगढ़ की पहली महिला ओलंपियन बनीं। एक ही हॉकी नर्सरी से पुरुष और महिला दोनों वर्गों में ओलंपियन निकलना राजनांदगांव की खेल प्रतिभा की गहराई को बताता है।
सिर्फ ओलंपियन ही नहीं, लंबी है सितारों की फेहरिस्त
राजनांदगांव से मृणाल चौबे और रेणुका राजपूत जैसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी निकले। जूनियर से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक इन खिलाड़ियों ने अपनी पहचान बनाई। वहीं रायपुर की हॉकी विरासत भी कम समृद्ध नहीं रही। नुरूल लतीफ उन शुरुआती प्रमुख खिलाड़ियों में रहे, जिन्होंने रायपुर से खेलते हुए अंतरराष्ट्रीय हॉकी में पहचान बनाई।
इसके बाद जॉन विल्सन, सुरजीत सिंह रंधावा, नीता डुमरे, सबा अंजुम, मृणाल चौबे और राजेश्वरी यादव जैसे नाम भारतीय हॉकी से जुड़े। यानी छत्तीसगढ़ में हॉकी की कहानी किसी एक खिलाड़ी या एक शहर तक सीमित नहीं है। यह कई दशकों में तैयार हुई उस खेल संस्कृति की कहानी है, जिसने मैदान से राष्ट्रीय टीम तक खिलाड़ियों को पहुंचाया।
रायपुर की हॉकी ने पाकिस्तान तक छोड़ी छाप

छत्तीसगढ़ की हॉकी विरासत की एक दिलचस्प कड़ी विभाजन के बाद पाकिस्तान से भी जुड़ती है। रायपुर से जुड़े डॉ. वहीद, मुजाहिर बारी सिद्दीकी और जिया-उर-रहमान ने पाकिस्तान में हॉकी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। डॉ. वहीद पाकिस्तान की ओर से दो ओलंपिक में खेले और हॉकी पर किताब भी लिखी। मुजाहिर बारी ने कॉमेंट्री के क्षेत्र में नाम कमाया और दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में जाकर हॉकी मैचों की कॉमेंट्री की। वहीं जिया-उर-रहमान ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी मुकाबलों में टेक्निकल डायरेक्टर के रूप में सेवाएं दीं।
अब नई पीढ़ी के लिए लीग का मंच
अब छत्तीसगढ़ में पहली हॉकी लीग शुरू होने जा रही है। यह लीग उस लंबी विरासत को नया मंच दे सकती है, जिसकी शुरुआत दशकों पहले छोटे मैदानों और स्थानीय प्रतियोगिताओं से हुई थी।हॉकी लीग से प्रदेश के युवा खिलाड़ियों को बड़े स्तर पर प्रतिस्पर्धा का अनुभव मिलेगा। स्थानीय प्रतिभाओं को पहचान मिलने और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिलने की उम्मीद है।

ध्यानचंद से लीग तक… कहानी अभी जारी है
मेजर ध्यानचंद जब राजनांदगांव आए थे, तब शायद किसी ने कल्पना नहीं की होगी कि आने वाले दशकों में इसी जमीन से ओलंपियन निकलेंगे और छत्तीसगढ़ की हॉकी देशभर में अपनी पहचान बनाएगी। एयरमेन बेस्टियन से रेणुका यादव तक की यह यात्रा अब पहली हॉकी लीग के साथ नए मोड़ पर पहुंच रही है।छत्तीसगढ़ को ‘हॉकी की नर्सरी’ कहना इसलिए सिर्फ एक जुमला नहीं है। इसके पीछे ओलंपिक पदक, अंतरराष्ट्रीय मुकाबले, भारतीय टीम की जर्सी और कई पीढ़ियों की मेहनत की कहानी है।अब देखना यह है कि इस नई लीग के मैदान से छत्तीसगढ़ का अगला बेस्टियन या अगली रेणुका यादव कौन निकलता है।
मेजर ध्यानचंद की जयंती एवं राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री अरुण साव ने प्रदेशवासियों और खिलाड़ियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि मेजर ध्यानचंद का जीवन और खेल के प्रति उनका समर्पण देश के करोड़ों खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ हॉकी लीग इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लीग के माध्यम से प्रदेश के युवा खिलाड़ियों को उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा का अनुभव मिलेगा और उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का बेहतर मंच उपलब्ध होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि छत्तीसगढ़ हॉकी लीग प्रदेश में हॉकी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी और भारतीय हॉकी के इतिहास में एक नई शुरुआत का रूप ले सकती है।
मेजर ध्यानचंद की जयंती एवं राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री अरुण साव ने प्रदेशवासियों और खिलाड़ियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि मेजर ध्यानचंद का जीवन और खेल के प्रति उनका समर्पण देश के करोड़ों खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ हॉकी लीग इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लीग के माध्यम से प्रदेश के युवा खिलाड़ियों को उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा का अनुभव मिलेगा और उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का बेहतर मंच उपलब्ध होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि छत्तीसगढ़ हॉकी लीग प्रदेश में हॉकी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी और भारतीय हॉकी के इतिहास में एक नई शुरुआत का रूप ले सकती है।


