जेडी रेल लाइन में सिंगल ट्रैक पर सवाल: बस्तर को डर, कहीं मालगाड़ियों के बीच यात्री ट्रेनें न अटक जाएं

जगदलपुर। दुर्ग-जगदलपुर रेल लाइन परियोजना बस्तर के लिए महज नई रेल कनेक्टिविटी का माध्यम नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, उद्योग और यात्री सुविधाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकती है। रावघाट से जगदलपुर के बीच करीब 144 किलोमीटर रेल लाइन के निर्माण कार्य को जल्द शुरू करने की तैयारी है। हालांकि परियोजना के सिंगल ट्रैक होने को लेकर अभी से सवाल उठने लगे हैं।
बस्तर के लोगों की चिंता है कि कहीं यह नई रेल लाइन भी मुख्य रूप से माल परिवहन तक सीमित होकर न रह जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि परियोजना की शुरुआती योजना में ही भविष्य की यात्री जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है, ताकि बाद में दोहरीकरण के लिए अलग से लंबी प्रक्रिया और अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की समस्या सामने न आए।
केके लाइन के अनुभव से बढ़ी चिंता
बस्तर में पहले से संचालित किरंदुल-कोत्तावालसा यानी केके लाइन का अनुभव भी इस बहस को मजबूत करता है। सिंगल ट्रैक पर मालगाड़ियों की आवाजाही बढ़ने के साथ यात्री ट्रेनों के संचालन और विस्तार में व्यावहारिक दिक्कतें सामने आती हैं। ऐसे में जेडी लाइन के भविष्य को लेकर नागरिक अभी से सतर्कता बरतने की मांग कर रहे हैं।
आठ से ज्यादा खदानों को जोड़ने की योजना
जेडी रेल लाइन के जरिए क्षेत्र की आठ से अधिक लौह अयस्क खदानों को जोड़ने की योजना है। इससे आने वाले समय में बड़ी संख्या में मालगाड़ियों के संचालन की संभावना है। खनिज परिवहन बढ़ने से रेलवे को आर्थिक लाभ मिल सकता है, लेकिन इसी के साथ यात्री ट्रेनों के लिए पर्याप्त समय और परिचालन क्षमता उपलब्ध रखना भी बड़ी चुनौती होगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शुरुआत से ही लाइन को केवल माल परिवहन की जरूरतों के आधार पर विकसित किया गया, तो भविष्य में बस्तर के लोगों को नियमित और सस्ती यात्री रेल सेवा के लिए फिर संघर्ष करना पड़ सकता है।
अभी से हो दोहरीकरण की तैयारी
नागरिकों की मांग है कि जेडी रेल लाइन की दीर्घकालीन जरूरतों को देखते हुए दोहरीकरण का प्रावधान अभी से योजना में शामिल किया जाए। इसके साथ ही भविष्य में दोहरी लाइन के लिए अलग से भूमि अधिग्रहण की स्थिति न बने, इसके लिए जमीन एक बार में ही भविष्य की जरूरत के अनुरूप लेने का सुझाव दिया जा रहा है।
सिर्फ खनिज परिवहन का रास्ता न बने
बस्तर के लोगों की सबसे बड़ी अपेक्षा यही है कि नई रेल लाइन का लाभ आम यात्रियों को भी मिले। उनका कहना है कि जेडी रेल लाइन बस्तर के औद्योगिक और खनिज विकास के साथ-साथ शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और व्यापार के लिए भी महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी बन सकती है।
ऐसे में जरूरी है कि परियोजना की योजना बनाते समय सिर्फ मौजूदा माल परिवहन की जरूरतों को नहीं, बल्कि आने वाले दशकों की यात्री जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाए। लोगों की मांग है कि जेडी रेल लाइन बस्तर के लिए केवल लौह अयस्क परिवहन का कॉरिडोर न बने, बल्कि नियमित, सुरक्षित और सस्ती यात्री रेल सेवा का मजबूत माध्यम भी बने।




