छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद खत्म, अब नेताओं की सुरक्षा हटाने को लेकर होगी समीक्षा, जल्द होगा फैसला

बस्तर के 100 से ज्यादा नेताओं को मिली है सुरक्षा,इनमें सैकड़ों जवान तैनात
रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में बड़ी सफलता के बाद अब नेताओं और जनप्रतिनिधियों को मिली अतिरिक्त सुरक्षा की समीक्षा की तैयारी है। नक्सलवाद खत्म हुए करीब पांच महीने हो चुके हैं, लेकिन अभी भी 100 से अधिक जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा में सैकड़ों जवान तैनात हैं। इनमें करीब 40 जनप्रतिनिधियों को भारी सुरक्षा घेरा मिला हुआ है।
सरकार अब यह आकलन करने जा रही है कि किन नेताओं की सुरक्षा को कम किया जा सकता है, किनकी सुरक्षा यथावत रखनी जरूरी है और किन मामलों में अतिरिक्त सुरक्षा हटाई जा सकती है। हालांकि, सुरक्षा समीक्षा का मतलब सभी नेताओं से सुरक्षा वापस लेना नहीं होगा।
गृह मंत्री बोले- समीक्षा के बाद होगा फैसला
उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर में नक्सली गतिविधियां लगभग खत्म होने के बाद नेताओं की सुरक्षा की समीक्षा की जाएगी। सुरक्षा हटाने, कम करने या यथावत रखने का निर्णय समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक, नक्सल विरोधी अभियान के लिए जरूरी सुरक्षा बल बस्तर में तैनात रहेंगे। नेताओं को नक्सली खतरे के चरम दौर में उपलब्ध कराए गए अतिरिक्त सुरक्षा घेरे की अलग से समीक्षा की जाएगी।
वास्तविक खतरा मिलने पर जारी रहेगी सुरक्षा
सुरक्षा समीक्षा में किसी नेता की सुरक्षा पूरी तरह हटाना अनिवार्य नहीं होगा। जिन जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अभी भी गंभीर खतरा पाया जाएगा, उनकी सुरक्षा बरकरार रखी जा सकती है। बदलाव मुख्य रूप से उस अतिरिक्त सुरक्षा में होने की संभावना है, जो नक्सली खतरे के चरम दौर में उपलब्ध कराई गई थी।सूत्रों के अनुसार, बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों में नेताओं, पूर्व जनप्रतिनिधियों और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा का नए सिरे से आकलन किया जा रहा है। इसमें वर्तमान नक्सली गतिविधियों की स्थिति, खतरे की प्रकृति, संबंधित व्यक्ति की राजनीतिक भूमिका और उसकी आवाजाही जैसे पहलुओं को आधार बनाया जा सकता है।
अगर सुरक्षा में कटौती की जाती है तो इन जवानों को पुलिस की नियमित ड्यूटी, कानून-व्यवस्था और अन्य सुरक्षा अभियानों में लगाया जा सकेगा।
बस्तर के नेताओं ने कहा- अभी भी खतरा
भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं बीजापुर निवासी जी वेंकट ने कहा कि नक्सलवाद खत्म होने के बाद नेताओं को दी गई सुरक्षा कम किए जाने की जानकारी मिली है। उन्होंने बताया कि उन्हें वाई श्रेणी, जबकि पूर्व मंत्री महेश गागड़ा को जेड श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है।
जी वेंकट के मुताबिक, नेताओं को अंदरूनी इलाकों में जाना पड़ता है, ऐसे में फिलहाल सुरक्षा में कटौती नहीं की जानी चाहिए।वहीं वनमंत्री केदार कश्यप, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अध्यक्ष दिनेश कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण देव, पूर्व विधायक संतोष बाफना और अजजा आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी ने कहा कि उन्हें नेताओं की सुरक्षा कम किए जाने की कोई जानकारी नहीं है।
रूपसिंह मंडावी ने बताया कि दो दिन पहले ही उन्हें शासन की ओर से कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला है और फिलहाल उनके पास पहले से दो पीएसओ हैं।
भाजपा और कांग्रेस के कई नेताओं को मिली सुरक्षा
नक्सली खतरे के चलते बस्तर संभाग में भाजपा और कांग्रेस के कई नेताओं को अलग-अलग श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है। इनमें भाजपा के धनीराम बारसे, कोरसा सन्नू, संजय शोरी, विश्वराज सिंह, हुंगाराम मरकाम, श्रीनिवास मुदलियार, कमलेश मंडावी, लव कुमार रायडू, फूलचंद गागड़ा, घासीराम नाग, जगर लक्ष्मैया, संजय लुक्कड़, सुधीर पांडेय, मनीष सुराना, रामू नेताम, कमला नाग, जशवीर नेगी, संतोष गुप्ता, कामो कुंजाम, सत्यजीत सिंह चौहान, कुलदीप ठाकुर, सोमडू कोर्राम, धीरेन्द्र प्रताप सिंह, जसकेतू उसेंडी, देवलाल दुग्गा, मनीराम कश्यप और जी वेंकट समेत कई नेता शामिल हैं।वहीं कांग्रेस के छबिंद्र कर्मा, पूर्व विधायक देवती कर्मा, बीजापुर विधायक विक्रम शाह मंडावी, कोंटा विधायक कवासी लखमा, पूर्व विधायक रेखचंद जैन, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मंत्री मोहन मरकाम और जिला कांग्रेस अध्यक्ष कवासी हरीश समेत अन्य नेताओं को भी सुरक्षा मिली हुई है।
नक्सल अभियान का बल रहेगा, VIP सुरक्षा की होगी समीक्षा
अधिकारियों का कहना है कि नक्सल विरोधी अभियान के लिए आवश्यक बल को बस्तर से हटाने की कोई योजना नहीं है। समीक्षा मुख्य रूप से VIP सुरक्षा में तैनात अतिरिक्त जवानों को लेकर होगी। सरकार का उद्देश्य खतरे के वर्तमान आकलन के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था को संतुलित करना है, ताकि जरूरतमंद नेताओं की सुरक्षा भी बनी रहे और अतिरिक्त बल का उपयोग पुलिसिंग व अन्य सुरक्षा कार्यों में किया जा सके।



