
रायपुर/जगदलपुर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah ने आज बस्तर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए देश के नक्सलमुक्त होने को “ऐतिहासिक उपलब्धि” बताया। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि जिस बस्तर क्षेत्र में यह बैठक हो रही है, वह अब पूरी तरह नक्सलमुक्त हो चुका है।
बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami समेत चारों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
अमित शाह ने कहा कि देश को नक्सलवाद से मुक्त कराने का पूरा श्रेय सुरक्षाबलों की बहादुरी, केंद्रीय एजेंसियों की सटीक रणनीति और राज्यों व केंद्र सरकार के “Whole of the Government Approach” को जाता है। उन्होंने कहा कि नक्सलमुक्त क्षेत्रों में केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि विकास पहुंचाने का काम भी तेजी से किया गया है।
गृह मंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकार की लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। उनका कहना था कि दशकों तक नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा में लाना अब सबसे बड़ी प्राथमिकता है। जब तक इन इलाकों को देश के अन्य विकसित क्षेत्रों के बराबर नहीं लाया जाएगा, तब तक यह अभियान जारी रहेगा।अमित शाह ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि क्षेत्रीय परिषद की बैठकें अब “संवाद से समाधान” का मजबूत मंच बन चुकी हैं। उन्होंने बताया कि 2004-2014 के दौरान जहां केवल 11 बैठकें हुई थीं, वहीं 2014 से 2026 के बीच 32 बैठकें आयोजित की गईं। इसी अवधि में 1729 मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें लगभग 80 प्रतिशत मामलों का समाधान हो चुका है।
बैठक में कुपोषण, शिक्षा, साइबर सुरक्षा, न्याय व्यवस्था और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर भी जोर दिया गया। गृह मंत्री ने स्कूल ड्रॉपआउट कम करने, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, मिलावटखोरी पर सख्त कार्रवाई और POCSO व दुष्कर्म मामलों में शत-प्रतिशत दोषसिद्धि सुनिश्चित करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि 1930 साइबर हेल्पलाइन को केंद्रीय गृह मंत्रालय के मानकों के अनुरूप अपडेट किया जाए और पांच साल से अधिक पुराने मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष अदालतें गठित हों। अमित शाह ने लक्ष्य तय करते हुए कहा कि जिस प्रकार देश को नक्सलवाद से मुक्त किया गया है, उसी तरह 2029 से पहले हर आपराधिक मुकदमे को तीन साल के भीतर सुप्रीम कोर्ट तक अंतिम अंजाम तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित करनी होगी।




