छत्तीसगढ़

महिला-बाल विकास का दो वर्षों का रिपोर्ट कार्ड, राज्य में सशक्तिकरण, पोषण और सुरक्षा की ऐतिहासिक उपलब्धियाँ

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग ने विगत दो वर्षों में महिलाओं और बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में उल्लेखनीय कार्य करते हुए सामाजिक बदलाव की मजबूत नींव रखी है। सशक्तिकरण, पोषण, सुरक्षा और आधारभूत संरचना—इन चार स्तंभों पर केंद्रित योजनाओं ने प्रदेश को विकास के नए मुकाम तक पहुंचाया है।

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महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन की सबसे बड़ी पहल महतारी वंदन योजना रही। 01 मार्च 2024 से शुरू इस योजना के तहत 69.32 लाख महिलाओं को अब तक ₹14,307 करोड़ की राशि सीधे खातों में हस्तांतरित की गई। आंकड़े बताते हैं कि 75 प्रतिशत महिलाएं इस सहायता राशि के उपयोग पर स्वयं निर्णय ले रही हैं। वहीं करीब 30 हजार महिलाओं ने स्वरोजगार एवं व्यवसाय के लिए ₹73 करोड़ का ऋण लेकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया है। प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना के अंतर्गत 4.81 लाख महिलाओं को ₹237.44 करोड़ की सहायता दी गई, जिससे छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान मिला।स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव सामने आए हैं। नवंबर 2023 की तुलना में नवंबर 2025 तक बच्चों में स्टंटिंग, वेस्टिंग और अंडरवेट की दरों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। 19.64 लाख हितग्राहियों को पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसमें महिला स्व-सहायता समूहों की अहम भूमिका है।

सुरक्षा और संरक्षण के मोर्चे पर सखी वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन 181 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के जरिए हजारों मामलों में त्वरित सहायता दी गई। आंगनबाड़ी केंद्रों के उन्नयन, नई नियुक्तियों और डिजिटल प्रणालियों ने व्यवस्था को और मजबूत किया है।कुल मिलाकर, महिला-बाल विकास विभाग का यह दो वर्षों का रिपोर्ट कार्ड छत्तीसगढ़ को एक सशक्त, सुरक्षित और संवेदनशील समाज की दिशा में आगे बढ़ता दिखाता है।

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CG Bulletin Desk1

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