छत्तीसगढ़ में TET की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों की टेट मुक्ति रैली, शिक्षा मंत्री बोले – विभागीय परीक्षा पर सरकार कर रही विचार

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों का विरोध तेज हो गया है। शिक्षक संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर मंगलवार को प्रदेशभर के शिक्षकों ने जिला मुख्यालयों में ‘टेट मुक्ति रैली’ निकालकर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के बाद शिक्षकों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव और DPI के नाम कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों ने TET की अनिवार्यता समाप्त करने सहित पांच सूत्रीय मांगें सरकार के सामने रखीं।
शिक्षकों का दावा है कि TET की अनिवार्यता के चलते प्रदेश के करीब 80 हजार शिक्षकों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। इसी को लेकर शिक्षक संगठनों ने सरकार से तत्काल राहत देने की मांग की है।
मध्यप्रदेश की तर्ज पर विभागीय परीक्षा पर विचार- गजेंद्र यादव, शिक्षा मंत्री
शिक्षकों के प्रदर्शन और उनकी मांगों को लेकर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि कोई भी शिक्षक सरकार से बाहर का नहीं है और सरकार उनकी चिंता कर रही है। उन्होंने कहा कि TET की अनिवार्यता का मामला सरकार द्वारा मनमाने तरीके से लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों से जुड़ा हुआ है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार अब मध्यप्रदेश की तर्ज पर विभागीय परीक्षा लागू करने की तैयारी पर विचार कर रही है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि मध्यप्रदेश में जिस तरह विभागीय परीक्षा का प्रावधान लागू है, उसी तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
शिक्षकों ने रखीं पांच सूत्रीय मांगें
शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें सबसे प्रमुख TET की अनिवार्यता समाप्त करना है। इसके अलावा शिक्षकों ने पुरानी सेवा की गणना कर पेंशन संबंधी लाभ देने की मांग भी की है।
शिक्षकों की अन्य मांगों में केंद्रीय वेतनमान लागू कर वेतन विसंगति दूर करना, D.Ed. प्रशिक्षित शिक्षकों को ब्रिज कोर्स के माध्यम से B.Ed. कराने तथा भर्ती-पदोन्नति नियम 2026 को निरस्त करने की मांग शामिल है।
प्रदेशभर में शिक्षकों ने जताया विरोध:शिक्षक संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर जिला मुख्यालयों में निकाली गई रैलियों में बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। शिक्षकों ने TET की अनिवार्यता को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की।
अब शिक्षकों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। विभागीय परीक्षा को लेकर सरकार की ओर से आगे क्या व्यवस्था बनाई जाती है और TET की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों को किस तरह की राहत मिलती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।




