हरित छत्तीसगढ़ के साथ वनवासियों की समृद्धि पर जोर, दो साल में 3.67 करोड़ पौधे रोपे : केदार कश्यप

रायपुर। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार “हरित छत्तीसगढ़–समृद्ध छत्तीसगढ़” के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। सरकार की प्राथमिकता वन संरक्षण के साथ वनवासियों की समृद्धि, जनजातीय संस्कृति का संरक्षण, किसानों की आय बढ़ाना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना है।
नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में पत्रकार वार्ता में मंत्री कश्यप ने वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की उपलब्धियां और आगामी योजनाओं की जानकारी दी।
62 हजार एकड़ में 3.67 करोड़ पौधे
कश्यप ने बताया कि किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत पिछले दो वर्षों में 36,896 हितग्राहियों की 62,441 एकड़ कृषि भूमि पर 3.675 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं। योजना में पात्र किसानों को 5 एकड़ तक 100 प्रतिशत और 5 एकड़ से अधिक भूमि पर 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान दिया जा रहा है।
तेंदूपत्ता संग्राहकों को 757 करोड़ का भुगतान:प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्रहण दर 5,500 रुपए प्रति मानक बोरा है। वर्ष 2025 में 11.44 लाख परिवारों ने 13.85 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया, जिसके एवज में 757 करोड़ रुपए का ऑनलाइन भुगतान किया गया। वहीं 7.14 लाख संग्राहकों को 153 करोड़ रुपए प्रोत्साहन पारिश्रमिक दिया गया।
बस्तर में 21.67 लाख मानव-दिवस रोजगार
मंत्री ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के बाद बस्तर के माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग द्वारा फिर से वानिकी और विदोहन कार्य शुरू किए जा रहे हैं। दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर के दूरस्थ इलाकों में इमारती लकड़ी, बांस और अन्य वानिकी कार्य होंगे। इनसे 21.67 लाख मानव-दिवस रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
दो साल में लगभग दोगुनी हुई बाघों की संख्या
वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में सरकार ने बाघों की संख्या में वृद्धि का दावा किया। मंत्री के अनुसार वर्ष 2022 में प्रदेश में 18 बाघ थे, जो 2026 में बढ़कर 35 हो गए हैं। यह करीब 94 प्रतिशत वृद्धि है।गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व 2,829.387 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बताया गया। बांधवगढ़ से तीन बाघिनों के ट्रांसलोकेशन की अनुमति भी मिल चुकी है।
कृष्ण मृग 77 से बढ़कर 200 के पार: बारनवापारा अभयारण्य में कृष्ण मृगों की संख्या 77 से बढ़कर 200 से अधिक हो गई है। मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 26 अप्रैल 2026 के मन की बात कार्यक्रम में इस उपलब्धि की सराहना की थी।वहीं इंद्रावती में वन भैंसों की संख्या 14 से 17 के बीच प्राकृतिक रूप से मौजूद है, जबकि असम से लाए गए वन भैंसों की संख्या 6 से बढ़कर 11 हो गई है।
‘गज संकेत’ से हाथी-मानव संघर्ष रोकने की पहल
मानव-हाथी द्वंद्व कम करने के लिए ‘गज संकेत’ ऐप और ‘गजरथ यात्रा’ शुरू की गई है। प्रदेश में 90 हाथी मित्र दलों के 545 प्रशिक्षित सदस्य गांवों में जागरूकता का काम कर रहे हैं।70 हजार से अधिक महिलाओं को आजीविका से जोड़ाप्रधानमंत्री जनजाति विकास मिशन और पीएम जनमन योजना के तहत लघु वनोपज के संग्रहण और प्रसंस्करण से 6 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों के 70 हजार से अधिक सदस्य लाभान्वित हुए हैं। वन धन केंद्रों से जुड़े महिला समूहों को 5 करोड़ रुपए से अधिक कमीशन दिया गया है।
ईको-टूरिज्म से रोजगार:प्रदेश में 240 प्राकृतिक पर्यटन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें 50 से अधिक केंद्र स्वावलंबी हो चुके हैं। बस्तर का धुड़मारास सामुदायिक पर्यटन का उदाहरण बनकर उभरा है। वहीं महासमुंद के शिशुपाल ईको ट्रेल को 45 लाख रुपए की लागत से विकसित किया गया है, जहां 832 मानव-दिवस रोजगार और 15 नियमित आजीविका के अवसर सृजित हुए हैं।
5 से 10 मिनट में वनाग्नि पर रिस्पॉन्स:वनाग्नि नियंत्रण के लिए फॉरेस्ट फायर अलर्ट एवं मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। मंत्री के अनुसार इससे रिस्पॉन्स टाइम पहले के 1-2 घंटे से घटकर 5 से 10 मिनट रह गया है। व्यवस्था को बीट स्तर तक विस्तारित किया जा रहा है।
मंत्री कश्यप ने कहा कि सरकार का लक्ष्य वन संरक्षण के साथ वनवासियों की समृद्धि, किसानों की आय में वृद्धि, महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार तथा वन्यजीव संरक्षण को गति देना है। सरकार प्रकृति और विकास के बीच संतुलन बनाते हुए छत्तीसगढ़ को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही है।




