छत्तीसगढ़

CG NEWS : 7.14 लाख संग्राहकों को 162.32 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन पारिश्रमिक राशि वितरण, तेन्दूपत्ता संग्राहकों की समृद्धि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : केदार कश्यप

रायपुर। सहकारिता सप्ताह एवं अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में तेन्दूपत्ता संग्राहकों के लिए ऐतिहासिक पहल करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में वर्ष-2023 के 7.14 लाख तेन्दूपत्ता संग्राहकों को 162.32 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन पारिश्रमिक राशि के वितरण का शुभारंभ किया गया।

इस अवसर पर वर्ष-2026 के उत्कृष्ट तेन्दूपत्ता संग्राहकों, वन धन विकास समितियों तथा महिला स्व-सहायता समूहों को भी सम्मानित किया गया और वन धन विकास केन्द्रों के नए उत्पादों का लोकार्पण एवं पुस्तक का विमोचन किया गया।

मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि तेन्दूपत्ता केवल एक वनोपज नहीं, बल्कि लाखों वनवासी परिवारों की आजीविका, सम्मान और आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि वनवासियों की मेहनत का लाभ सीधे उनके खातों तक पहुंचे। यही कारण है कि प्रदेश में वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और वनांचल के परिवार आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ अब केवल तेन्दूपत्ता व्यापार तक सीमित नहीं है। यह प्रदेश के लगभग 13.50 लाख लघु वनोपज संग्राहक परिवारों के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक उत्थान का सशक्त माध्यम बन चुका है। संग्राहकों को पारिश्रमिक, लाभांश, सामाजिक सुरक्षा, छात्रवृत्ति, चरणपादुका वितरण तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर लघु वनोपज खरीदी जैसी अनेक योजनाओं का लाभ निरंतर उपलब्ध कराया जा रहा है।

वन एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि सरकार की नीति केवल संग्रहण तक सीमित नहीं है, बल्कि इमली, महुआ, साल बीज, हर्रा, बहेरा और चिरौंजी जैसे लघु वनोपजों के मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण एवं विपणन के माध्यम से वनवासियों की आय बढ़ाने पर विशेष बल दिया जा रहा है। प्रदेश में संचालित 155 वन धन विकास केन्द्र स्थानीय महिलाओं और स्व-सहायता समूहों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर तैयार कर रहे हैं।

कार्यक्रम में गरियाबंद और महासमुंद जिला यूनियनों के छह तेन्दूपत्ता संग्राहकों को वर्ष-2023 की प्रोत्साहन पारिश्रमिक राशि का प्रतीकात्मक वितरण किया गया। वहीं गरियाबंद, महासमुंद एवं कटघोरा के उत्कृष्ट तेन्दूपत्ता संग्राहकों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया।

इसी अवसर पर नारायणपुर, जशपुर, जगदलपुर, गरियाबंद और कटघोरा की पांच उत्कृष्ट वन धन विकास समितियों को “सहकार प्रेरणा पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। साथ ही जशपुर, गरियाबंद, कटघोरा, धमतरी और कांकेर की महिला स्व-सहायता समूहों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए लाभांश राशि भी प्रदान की गई।

कार्यक्रम में वन धन विकास केन्द्रों द्वारा तैयार पांच नए हर्बल उत्पादों का लोकार्पण किया गया तथा “वन धन विकास केन्द्र : आदिवासी सशक्तिकरण की बदलती तस्वीर, छत्तीसगढ़” पुस्तक का विमोचन भी किया गया। यह पुस्तक राज्य में सहकारिता, लघु वनोपज आधारित आजीविका और आदिवासी सशक्तिकरण के सफल मॉडल का महत्वपूर्ण दस्तावेज बनेगी।

मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन, वनवासी और सहकारिता को विकास की नई धुरी बनाकर आगे बढ़ रही है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि जंगल की समृद्धि का सबसे बड़ा लाभ जंगल से जुड़े परिवारों को मिले, वनवासियों की आय में निरंतर वृद्धि हो और छत्तीसगढ़ देश में सहकारिता आधारित समावेशी विकास का अग्रणी मॉडल बनकर स्थापित हो।

cropped cg bulletin favicon
CG Bulletin Desk1

Show More

Related Articles

Back to top button
Home
Chhattisgarh
Search