बच्चों की परीक्षा के पर्चे में अडानी का विज्ञापन! छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, सरकार से जवाब की मांग

रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्कूली बच्चों की मासिक परीक्षा के प्रश्नपत्रों को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बच्चों को बांटे गए परीक्षा के प्रश्नपत्र में सवालों के साथ अडानी समूह का विज्ञापन भी प्रकाशित किया गया है। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर बच्चों की परीक्षा के पर्चे में किसी निजी कंपनी के प्रचार की जरूरत क्यों पड़ी?
प्रश्नपत्र की सामने आई तस्वीर में रसायन विज्ञान से संबंधित प्रश्न दिखाई दे रहे हैं। इसी प्रश्नपत्र पर अडानी समूह का विज्ञापन भी प्रकाशित है। यानी जिस पर्चे का इस्तेमाल बच्चों की शैक्षणिक परीक्षा के लिए होना था, उसी पर व्यावसायिक प्रचार भी मौजूद है।परीक्षा का पर्चा या विज्ञापन का माध्यम?
मामले ने शिक्षा जगत में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है क्या अब स्कूली बच्चों की परीक्षाओं के प्रश्नपत्र भी कंपनियों के विज्ञापन का माध्यम बनेंगे?
परीक्षा का प्रश्नपत्र विद्यार्थियों की पढ़ाई और ज्ञान का मूल्यांकन करने के लिए होता है। ऐसे में उसमें किसी निजी कंपनी का विज्ञापन प्रकाशित किए जाने को लेकर अभिभावकों और शिक्षा से जुड़े लोगों के बीच सवाल उठना स्वाभाविक है।
खासकर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बांटे जाने वाले प्रश्नपत्रों में इस तरह के विज्ञापन की अनुमति किसने दी और इसकी प्रक्रिया क्या थी, यह अब सबसे बड़ा सवाल बन गया है।शिक्षा मंत्री और विभाग से जवाब की मांगमामले को लेकर अब शिक्षा विभाग से स्पष्ट जवाब की मांग उठ रही है।
सवाल यह है कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाली संस्था या एजेंसी कौन है? क्या प्रश्नपत्र में विज्ञापन प्रकाशित करने की अनुमति दी गई थी? अगर अनुमति दी गई थी तो इसका निर्णय किस स्तर पर हुआ और इसके लिए क्या नियम तय किए गए हैं?
वहीं, यदि विभाग की ओर से ऐसी कोई अनुमति नहीं दी गई थी, तो प्रश्नपत्र में निजी कंपनी का विज्ञापन कैसे पहुंचा और इसकी जिम्मेदारी किसकी है?बच्चों की पढ़ाई में कॉर्पोरेट ब्रांडिंग पर बहसइस पूरे मामले ने शिक्षा और व्यावसायिक प्रचार के बीच की सीमा को लेकर भी बहस छेड़ दी है। सवाल यह भी है कि जिन बच्चों को स्कूल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की जिम्मेदारी सरकार की है, उनके परीक्षा प्रश्नपत्रों में निजी कंपनियों की ब्रांडिंग को किस नजरिए से देखा जाना चाहिए?
लोगों का कहना है कि बच्चों के परीक्षा पर्चे को किसी भी प्रकार के व्यावसायिक प्रचार का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। यदि किसी कंपनी से जुड़े विज्ञापन के लिए सरकारी या शैक्षणिक परीक्षा के प्रश्नपत्र का इस्तेमाल किया गया है, तो पूरे मामले की जांच होनी चाहिए।
अब सरकार के जवाब का इंतजारबच्चों को प्रश्नपत्र बांटे जाने के बाद सामने आए इस मामले ने छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग और सरकार इस मामले पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं और प्रश्नपत्र में निजी कंपनी का विज्ञापन प्रकाशित करने की अनुमति किस स्तर से दी गई थी।
कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना, पूछा- क्या सरकारी शिक्षा भी अब कॉर्पोरेट स्पॉन्सर्ड?

रायपुर जिला प्रशासन के स्कूलों में यूनिट टेस्ट के प्रश्नपत्रों पर छपे अडानी समूह के लोगो को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि जब प्रश्नपत्र के एक तरफ छत्तीसगढ़ शासन का लोगो और दूसरी तरफ अडानी का लोगो है, तो क्या अब सरकारी शिक्षा व्यवस्था भी कॉर्पोरेट स्पॉन्सर्ड हो गई है?
कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि “सरकार चल रही है या ब्रांड प्रमोशन?” पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की परीक्षा के लिए बांटे जा रहे प्रश्नपत्रों पर निजी कंपनी की ब्रांडिंग गंभीर सवाल खड़े करती है।
कांग्रेस ने आगे कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर यही स्थिति बनी रही तो कहीं भविष्य में “छत्तीसगढ़ का नाम भी अडानीगढ़” न कर दिया जाए।कांग्रेस की इस प्रतिक्रिया के बाद प्रश्नपत्रों पर अडानी का लोगो प्रकाशित किए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। अब निगाहें सरकार और जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया पर हैं कि प्रश्नपत्रों पर कंपनी का लोगो किस उद्देश्य से और किसकी अनुमति से प्रकाशित किया गया।




