छत्तीसगढ़

हरेली तिहार 2026: CM साय ने की कृषि औजारों और गौमाता की पूजा, CM हाउस में दिखा छत्तीसगढ़ी रंग

रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रथम लोक पर्व हरेली तिहार के अवसर पर नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, कृषि परंपरा और ग्रामीण जीवन की जीवंत झांकी में बदल गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधि-विधान से भगवान शिव, गौमाता और कृषि औजारों की पूजा-अर्चना कर प्रदेश में अच्छी वर्षा, भरपूर फसल, किसानों की समृद्धि और प्रदेशवासियों की सुख-खुशहाली की कामना की।इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मंत्रीगण, जनप्रतिनिधि, विभिन्न निगम-मंडल एवं आयोगों के पदाधिकारी, किसान और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।

हरेली प्रकृति और खेती-किसानी के गौरव का पर्व : सीएम साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों, विशेषकर किसान भाई-बहनों को हरेली तिहार की गाड़ा-गाड़ा बधाई दी। उन्होंने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति, प्रकृति और ग्रामीण जीवन के बीच आत्मीय रिश्ते का उत्सव है। यह पर्व हमें धरती, पशुधन, कृषि उपकरणों और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है और प्रदेश की बड़ी आबादी की आजीविका खेती-किसानी से जुड़ी है। किसान की समृद्धि ही गांव और प्रदेश की खुशहाली का मजबूत आधार है।

पारंपरिक वेशभूषा में पिंक ऑटो से पहुंचे मुख्यमंत्री: हरेली के अवसर पर मुख्यमंत्री साय पूरी तरह छत्तीसगढ़ी रंग में नजर आए। पारंपरिक वेशभूषा धारण कर मुख्यमंत्री विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के साथ महिला ऑटो चालक संगीता यादव के पिंक ऑटो में मुख्यमंत्री निवास परिसर से कार्यक्रम स्थल पहुंचे।मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के इस अंदाज ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया और हरेली उत्सव में आत्मीयता का रंग घोल दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत गौरी-गणेश एवं नवग्रह पूजन से हुई। मुख्यमंत्री ने मंत्रोच्चार के बीच शिवलिंग का अभिषेक किया और नांगर, रापा, कुदाल, फावड़ा सहित खेती-किसानी में उपयोग होने वाले कृषि औजारों की विधि-विधान से पूजा की। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को नमन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेली के समय तक खेती के कई प्रमुख कार्य पूरे हो चुके होते हैं। किसान इस अवसर पर प्रकृति और अपने कृषि साधनों की पूजा कर अच्छे कृषि वर्ष की कामना करते हैं। यह परंपरा हमारे पुरखों की प्रकृति के प्रति गहरी समझ और सम्मान को दर्शाती है।

गौमाता को खिलाई लोंदी, पशुधन संरक्षण का दिया संदेश:मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री निवास परिसर में निर्मित गौशाला पहुंचे और गौमाता की आरती एवं पूजा-अर्चना की। उन्होंने गाय और बछड़े को हरा चारा, चना-गुड़ तथा पारंपरिक लोंदी खिलाई।हरेली पर पशुधन को लोंदी खिलाने की लोक परंपरा पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और रोगों से बचाव की कामना से जुड़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन में पशुधन परिवार और कृषि व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है। हमारी लोक संस्कृति हमें पशुओं के प्रति संवेदनशीलता, सम्मान और संरक्षण की सीख देती है।

किसानों की समृद्धि के लिए सरकार प्रतिबद्ध:मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड की शुरुआत से किसानों को खेती के लिए सहज रूप से पूंजी उपलब्ध कराने का रास्ता खुला।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने सहकारी कृषि ऋण की ब्याज दरों को चरणबद्ध रूप से कम करते हुए शून्य प्रतिशत तक पहुंचाया। वर्तमान में किसानों को सहकारी बैंकों से शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि फसल बीमा को सरल बनाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और आधुनिक कृषि तकनीक किसानों तक पहुंचाने की दिशा में भी लगातार काम किया जा रहा है।

राज्य सरकार किसानों से 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीद रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे प्रदेश के लाखों किसान परिवारों को सीधा लाभ मिल रहा है।

पारिजात का पौधा लगाकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

हरेली के प्रकृति संरक्षण के संदेश को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री साय ने मुख्यमंत्री निवास परिसर में पारिजात का पौधा लगाया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी पारिजात का पौधा रोपा। इसके साथ ही मंत्रीगण और विभिन्न निगम-मंडल एवं आयोगों के पदाधिकारियों ने भी पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेली हमें प्रकृति से केवल लेने की नहीं, बल्कि उसे सहेजने और लौटाने की भी सीख देती है। पौधरोपण के साथ पौधों का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।

आधुनिक कृषि तकनीक का लिया जायजा: मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए कृषि एवं अन्य विभागीय स्टॉलों का अवलोकन किया। कृषि अभियांत्रिकी विभाग के स्टॉल पर उन्होंने आधुनिक कृषि यंत्रों की उपयोगिता और विशेषताओं की जानकारी ली।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने रायपुर के किसान इंद्र कुमार वर्मा को हार्वेस्टर पर मिलने वाली सब्सिडी के रूप में 16 लाख रुपए का चेक प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती में आधुनिक तकनीक और यंत्रीकरण से किसानों की लागत एवं श्रम कम करने के साथ उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल रही है।

ड्रोन दीदी चंद्रकली से मुख्यमंत्री ने किया संवाद: कृषि विभाग के स्टॉल पर मुख्यमंत्री ने ड्रोन दीदी चंद्रकली वर्मा से संवाद किया। चंद्रकली वर्मा ने बताया कि वह ड्रोन के माध्यम से खेतों में नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और कीटनाशकों का छिड़काव करती हैं तथा प्रति एकड़ 300 रुपए पारिश्रमिक प्राप्त करती हैं।उन्होंने बताया कि अब तक वह ढाई हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में ड्रोन से छिड़काव कर चुकी हैं और पिछले दो वर्षों में लगभग 7 लाख रुपए की आय अर्जित कर चुकी हैं।

मुख्यमंत्री ने उनकी उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि कृषि में तकनीक का इस्तेमाल महिलाओं के लिए आय और आत्मनिर्भरता के नए अवसर पैदा कर रहा है। ड्रोन दीदियां आधुनिक कृषि और महिला सशक्तीकरण की प्रेरक कड़ी बन रही हैं।

नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के स्टॉल पर मुख्यमंत्री ने किसानों को अरहर और उड़द दाल के मिनी किट वितरित किए। उन्होंने कृषि मित्रों द्वारा तैयार ब्रह्मास्त्र, नीमास्त्र और मधुमक्खी के मोम से बने लिप बाम जैसे उत्पादों की जानकारी भी ली।

गेड़ी, बिल्लस, गोटी और बाटी ने ताजा की गांव की यादें

हरेली तिहार के अनुरूप मुख्यमंत्री निवास को नीम और आम के पत्तों, गेंदे के फूलों और पारंपरिक ग्रामीण सजावट से सजाया गया था। परिसर में कदम रखते ही गांव और मेलों जैसा वातावरण नजर आया।गेड़ी, बिल्लस, गोटी और बाटी जैसे पारंपरिक खेल आयोजन के आकर्षण का केंद्र रहे। गेड़ी पर चढ़े कलाकारों और प्रतिभागियों ने हरेली की पहचान को जीवंत किया। ग्रामीण खेलों ने बच्चों और युवाओं को अपनी पारंपरिक खेल संस्कृति से परिचित कराया।

रहचुली ने भी लोगों को खूब आकर्षित किया और पूरे आयोजन में गांव के मेले जैसा माहौल बना रहा।लोक कलाकारों के साथ झूमे मुख्यमंत्री सायमांदर, ढोलक और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर लोक कलाकारों ने छत्तीसगढ़ी गीत और नृत्यों की प्रस्तुतियां दीं। हरेली के उल्लास में मुख्यमंत्री साय भी कलाकारों के बीच पहुंचे और उनके साथ पारंपरिक लोकधुनों पर झूमे।

मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर लोक कलाकारों का उत्साह और बढ़ गया। वहीं ठेठरी, खुरमी, बड़ा सहित विभिन्न छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्टॉलों ने आयोजन में पारंपरिक खानपान का रंग भर दिया।

किसान की खुशहाली से छत्तीसगढ़ की समृद्धि : डॉ. रमन सिंह

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की कृषि परंपरा, संस्कृति और प्रकृति से जुड़ा महत्वपूर्ण लोक पर्व है। कृषि औजारों, गौमाता और प्रकृति की पूजा हमारी कृतज्ञता की संस्कृति को अभिव्यक्त करती है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में किसानों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। किसानों को 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान का मूल्य मिल रहा है और महतारी वंदन योजना से माताओं-बहनों को आर्थिक संबल मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि किसान का घर खुशहाल और गांव मजबूत होगा, तभी छत्तीसगढ़ की समृद्धि का मार्ग और प्रशस्त होगा।

किसान समृद्ध होगा तो प्रदेश और देश समृद्ध होंगे : कृषि मंत्री

कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की खेती-किसानी, हरियाली और प्रकृति के प्रति आस्था का महापर्व है। हमारी संस्कृति प्रकृति के संरक्षण, पशुधन के सम्मान और अन्नदाता के श्रम के प्रति आदर का संदेश देती है।

उन्होंने कहा कि हरेली अपनी परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और खेती को अधिक समृद्ध बनाने का संकल्प लेने का अवसर है। किसान समृद्ध होगा तो प्रदेश और देश दोनों समृद्ध होंगे।मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की लोक अस्मिता और हमारी जड़ों का उत्सव है। आधुनिक विकास की तेज यात्रा के बीच अपनी संस्कृति, परंपरागत ज्ञान, ग्रामीण खेल, लोककला और खानपान को सहेजकर रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने बाबा भोलेनाथ, गौमाता और प्रकृति से प्रदेश पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के खेत लहलहाएं, किसानों के घर खुशहाली आए और प्रदेश निरंतर समृद्धि के पथ पर आगे बढ़े।

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CG Bulletin Desk1

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