CG NEWS: बिजली उपभोक्ताओं को झटका: 2026-27 के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी, घरेलू के लिए 30 से 50 पैसे, तो गैर घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं के लिए 20 से 40 पैसे की हुई बढ़ोतरी

रायपुर – छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों की घोषणा कर दी है। आयोग के फैसले के अनुसार घरेलू, गैर-घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी हो गई है। घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि की गई है, जबकि गैर-घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक दरें बढ़ाई गई हैं। कृषि पंपों के लिए भी बिजली दर में 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है।
हालांकि आयोग ने गैर-सब्सिडी वाले कृषि पंप कनेक्शनों को राहत देते हुए ऊर्जा प्रभार पर मिलने वाली छूट को 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया है। इससे किसानों को कुछ हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
आयोग के कानून सदस्य विनोद गनोदवाले, तकनीकी सदस्य अजय कुमार सिंह और सचिव सूर्या प्रकाश शुक्ला ने प्रेस वार्ता में बताया कि विद्युत वितरण कंपनी ने वर्ष 2026-27 के लिए 38,729 मिलियन यूनिट बिजली विक्रय और 32,520 करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व आवश्यकता का प्रस्ताव रखा था। विस्तृत परीक्षण और समीक्षा के बाद आयोग ने 39,760 मिलियन यूनिट बिजली विक्रय तथा 28,348 करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व आवश्यकता को मंजूरी दी।
वितरण कंपनी ने मौजूदा टैरिफ के आधार पर 6,304 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का अनुमान प्रस्तुत किया था, लेकिन आयोग ने गहन जांच के बाद केवल 1,662 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे को ही मान्य माना। आयोग का कहना है कि नई दरों से बिजली वितरण व्यवस्था को आर्थिक रूप से अधिक संतुलित और टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी।
आयोग ने क्या कहा?
प्रेस वार्ता में आयोग के कानून सदस्य विनोद गनोदवाले, तकनीकी सदस्य अजय कुमार सिंह और सचिव सूर्या प्रकाश शुक्ला ने बताया कि विद्युत वितरण कंपनी ने वर्ष 2026-27 के लिए 38,729 मिलियन यूनिट बिजली विक्रय और 32,520 करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व आवश्यकता का प्रस्ताव दिया था।
जांच और परीक्षण के बाद आयोग ने:
39,760 मिलियन यूनिट विद्युत विक्रय को मंजूरी दी।
28,348 करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व आवश्यकता स्वीकृत की।
राजस्व घाटे में बड़ी कटौती वितरण कंपनी ने मौजूदा टैरिफ के आधार पर 6,304 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का दावा किया था। आयोग ने विस्तृत जांच के बाद केवल 1,662 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे को ही मान्य माना।




