
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बोले – सरकार परीक्षा दोबारा कराने और दोषियों पर कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध, संसद में चर्चा से कांग्रेस बच रही है
रायपुर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव ने NEET पेपर लीक मामले को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के हितों के नाम पर किए गए आंदोलन को कांग्रेस ने राजनीतिक रंग दे दिया, जिससे वास्तविक मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी।
प्रदेश महामंत्री नवीन मार्कण्डेय, अखिलेश जैन सहित अन्य नेताओं की मौजूदगी में आयोजित प्रेसवार्ता में सिंहदेव ने कहा कि संसद में पक्ष और विपक्ष के बीच छात्रों की समस्याओं और उनके समाधान पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए थी, लेकिन कांग्रेस ने अपने राजनीतिक हितों के लिए आंदोलन का स्वरूप बदल दिया।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों के हितों को लेकर संवेदनशील हैं। इसी कारण परीक्षा दोबारा कराने और पेपर लीक के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का निर्णय लिया गया है। सरकार इस मामले में पूरी जिम्मेदारी के साथ काम कर रही है।
किरण सिंहदेव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस संसद के भीतर चर्चा नहीं चाहती और सदन के बाहर हंगामे के जरिए मुद्दे को भटकाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन प्रधानमंत्री के लिए अपशब्दों का प्रयोग, पत्रकारों पर हमला और हिंसक घटनाएं भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा के अनुरूप नहीं हैं।
उन्होंने राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष जैसे संवैधानिक पद की गरिमा बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन उनका व्यवहार संसद की गरिमा के अनुरूप नहीं रहा। उन्होंने कहा कि संविधान का सम्मान केवल हाथ में किताब लेकर घूमने से नहीं, बल्कि उसके मूल्यों का पालन करने से होता है।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं पहले भी विभिन्न सरकारों के दौरान हुई हैं। उन्होंने यूपीए सरकार के समय एम्स एमबीबीएस, हरियाणा और रेलवे भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।
कांग्रेस के भाजपा कार्यालय घेराव पर प्रतिक्रिया देते हुए किरण सिंहदेव ने कहा कि भाजपा का प्रदर्शन पूरी तरह अनुशासित था। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रदर्शन स्थल पर पत्थर कहां से आए और पत्थरबाजी कैसे हुई। उनका दावा था कि भाजपा की ओर से किसी भी प्रकार की हिंसक घटना नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध होना स्वाभाविक है, लेकिन छात्रों के मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय सभी दलों को समाधान निकालने की दिशा में मिलकर काम करना चाहिए।




