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गृहमंत्री का PA बताकर नौकरी दिलाने का झांसा, 15 लोगों से 25 लाख की ठगी; दो गिरफ्तार

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सरकारी नौकरी लगवाने और ट्रांसफर कराने के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है। सिविल लाइन थाना पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने करीब 15 लोगों से लगभग 25 लाख रुपये लेने की बात पूछताछ में स्वीकार की है।

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पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में आदित्य मोहन पंडा (23) निवासी कमल विहार और संतराम यादव (38) निवासी हिमालया हाइट्स, देवपुरी शामिल हैं।

खुद को गृहमंत्री का निज सहायक बताता था आरोपी


पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने लोगों को प्रभावित करने के लिए प्रभावशाली व्यक्तियों से संपर्क होने का दावा किया। इनमें आदित्य मोहन पंडा पर आरोप है कि वह खुद को गृहमंत्री का निज सहायक बताकर लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देता था। पुलिस के अनुसार, यह पहचान फर्जी थी। आरोपियों पर नौकरी लगवाने के साथ-साथ सरकारी कर्मचारियों का ट्रांसफर कराने के नाम पर भी रकम लेने का आरोप है।

70 हजार रुपये लेकर नहीं दिलाई नौकरी


मामले की शुरुआत बोस्टो तांडी की शिकायत से हुई। शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने उसे सरकारी नौकरी लगवाने का भरोसा दिया और इसके एवज में 70 हजार रुपये लिए। रकम देने के बाद भी नौकरी नहीं लगी, जिसके बाद उसने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने शिकायतकर्ता और अन्य गवाहों से पूछताछ के बाद दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया।

पूछताछ में 15 लोगों से ठगी का खुलासा

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में दोनों आरोपियों ने करीब 15 लोगों से नौकरी और ट्रांसफर कराने के नाम पर लगभग 25 लाख रुपये लेने की बात स्वीकार की है। हालांकि पुलिस अभी पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि ठगी का वास्तविक दायरा कितना है।

फर्जी दस्तावेजों की भी जांच


पुलिस ने मामले में फर्जी पहचान और नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों के इस्तेमाल की भी जांच शुरू की है। आरोपियों द्वारा लोगों को भरोसे में लेने के लिए किन दस्तावेजों या अन्य माध्यमों का इस्तेमाल किया गया, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक लेनदेन और अन्य संपर्कों की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस कथित ठगी में कोई और व्यक्ति शामिल है या नहीं।
पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले में ठगी की रकम, पीड़ितों की संख्या और कथित नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।

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CG Bulletin Desk1

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