सरगुजा ओलंपिक का लोगो और शुभंकर ‘गजरु’ लॉन्च, CM साय बोले सरगुजा पूरे उत्साह के साथ ओलंपिक आयोजन को तैयार

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि सरगुजा अंचल पूरे मनोयोग, ऊर्जा और उमंग के साथ सरगुजा ओलंपिक के आयोजन के लिए तैयार है। उन्होंने आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित गरिमामयी समारोह में बस्तर ओलंपिक की तर्ज पर आयोजित होने वाले सरगुजा ओलंपिक के लोगो और शुभंकर “गजरु” का विधिवत अनावरण किया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सरगुजा अंचल के लोगों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बस्तर की तरह अब सरगुजा की खेल प्रतिभाओं को भी अपनी क्षमता दिखाने का एक सशक्त और व्यापक मंच मिलेगा।
12 खेल विधाओं में 3.50 लाख से अधिक खिलाड़ियों का पंजीयन
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि सरगुजा ओलंपिक के लिए 12 खेल विधाओं में लगभग 3 लाख 50 हजार खिलाड़ियों का पंजीयन होना, क्षेत्र के युवाओं के उत्साह, ऊर्जा और खेलों के प्रति गहरे लगाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक को जिस तरह जनभागीदारी के कारण राष्ट्रीय पहचान मिली, वही उत्साह अब सरगुजा ओलंपिक को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।
उन्होंने आयोजन की तैयारियों की विस्तृत जानकारी लेते हुए सफल आयोजन के लिए अग्रिम शुभकामनाएं भी दीं।
विजेता खिलाड़ियों को मिलेगा प्रशिक्षण अकादमियों में सीधा प्रवेश
उप मुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने कहा कि सरगुजा ओलंपिक से क्षेत्र के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा और कौशल दिखाने का बेहतरीन अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता के विजेता खिलाड़ियों को राज्य की खेल प्रशिक्षण अकादमियों में सीधे प्रवेश दिया जाएगा तथा उन्हें यूथ आइकॉन के रूप में घोषित कर युवाओं और बच्चों को खेलों से जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा।


लोगो और शुभंकर में झलकती है सरगुजा की पहचान
सरगुजा ओलंपिक 2026 का लोगो इस अंचल की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और खेल भावना का जीवंत प्रतीक है। लोगो के केंद्र में मैनपाट स्थित प्रसिद्ध टाइगर पॉइंट जलप्रपात को दर्शाया गया है, जो हरियाली, ऊर्जा और निरंतर प्रवाह का प्रतीक है।चारों ओर 12 खेलों के प्रतीक चिन्ह समावेशिता और समान अवसर का संदेश देते हैं। रंगों का संयोजन आयोजन की जीवंतता, उत्साह और एकता को दर्शाता है। लाल रंग का विशेष सांस्कृतिक महत्व पहाड़ी कोरवा जनजाति की परंपराओं से जुड़ा हुआ है, जहां इसे शक्ति, साहस और जीवन-ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
शुभंकर “गजरु” सरगुजा अंचल की प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है। आदिवासी समाज में हाथी को बल, धैर्य, बुद्धिमत्ता और एकता का प्रतीक माना जाता है, जो खेल भावना और टीमवर्क के मूल्यों को सशक्त रूप से प्रस्तुत करता है।
विकासखंड से संभाग स्तर तक होंगी प्रतियोगिताएं
सरगुजा ओलंपिक के लिए 28 दिसंबर 2025 से 25 जनवरी 2026 तक पंजीयन किया गया, जिसमें 06 जिलों से लगभग 3.50 लाख प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया।इनमें 1.59 लाख पुरुष और 1.89 लाख महिलाएं शामिल हैं।
कबड्डी, खो-खो, तीरंदाजी, फुटबॉल, वॉलीबॉल, हॉकी, कुश्ती, रस्साकशी सहित 12 खेल विधाओं में विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। समारोह में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, सचिव खेल यशवंत कुमार, संचालक खेल तनुजा सलाम सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।




