
रायपुर। झीरम घाटी हत्याकांड में एनआईए की विशेष अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस ने इसे “आधा-अधूरा न्याय” करार दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस अदालत के फैसले का सम्मान करती है, लेकिन इस फैसले से झीरम हत्याकांड के पीछे की कथित राजनीतिक साजिश का पर्दाफाश नहीं हुआ है।
पत्रकार वार्ता में बैज ने आरोप लगाया कि एनआईए की जांच शुरू से दिशाहीन रही और राजनीतिक षड्यंत्र के पहलू की जांच नहीं की गई। उन्होंने कहा कि एनआईए ने घटना में करीब 200 नक्सलियों के शामिल होने की बात मानी थी और 39 लोगों को नामजद किया गया था, लेकिन आरोप केवल 10 लोगों पर सिद्ध हुए। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि बड़े नक्सली नेताओं को जांच के दायरे से बाहर क्यों किया गया।
कांग्रेस ने उठाए कई सवाल
दीपक बैज ने पूछा कि कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा क्यों हटाई गई थी और यात्रा का मार्ग किसने और क्यों बदलवाया था। हमले की योजना किसने बनाई, इसका जवाब भी सामने आना चाहिए।उन्होंने कहा कि समय-समय पर झीरम हमले में शामिल बताए गए कई बड़े नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। कांग्रेस का आरोप है कि इनसे एनआईए ने पूछताछ क्यों नहीं की और उन्हें अभियोजित क्यों नहीं किया गया।
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि हमले में घायल और जीवित बचे प्रत्यक्षदर्शियों से कितनी पूछताछ हुई। पार्टी के मुताबिक, कई प्रभावित लोग शपथ पत्र के साथ जांच एजेंसियों के सामने पहुंचे, लेकिन उनके बयान जांच में शामिल नहीं किए गए।
बड़े नक्सली नेताओं के नाम हटाने पर सवाल
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एनआईए की शुरुआती एफआईआर में गणपति (मुपल्ला लक्ष्मण राव) और रमन्ना समेत कई बड़े नक्सली नेताओं के नाम थे। 21 मार्च 2014 को इन दोनों समेत 26 फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी हुआ था। कांग्रेस ने सवाल किया कि बाद की चार्जशीट से इन नामों को क्यों हटाया गया।पार्टी ने देवा उर्फ सुक्का समेत अन्य वांछित नक्सलियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि जिन कई नक्सलियों को एनआईए ने फरार और वांछित घोषित किया था, उनमें से कुछ बाद में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। ऐसे में उनसे झीरम मामले में पूछताछ हुई या नहीं, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।
सरेंडर कर चुके नक्सलियों से पूछताछ की मांग
कांग्रेस ने चैतू उर्फ श्याम दादा, रूपेश उर्फ मोल्ला राजिरड्डी, निर्मला उर्फ सुमित्रा, भूपति उर्फ सोनू दादा और केंद्रीय समिति सदस्य सुजाता सहित आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से झीरम मामले में पूछताछ किए जाने की मांग की।
पार्टी ने सवाल किया कि यदि इन लोगों के खिलाफ पहले इनाम घोषित था और उन्हें नक्सली संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर बताया गया था, तो आत्मसमर्पण के बाद झीरम मामले में उनसे पूछताछ क्यों नहीं की गई।
भाजपा पर लगाया जांच रोकने का आरोप
कांग्रेस ने भाजपा पर झीरम मामले की सच्चाई सामने नहीं आने देने का आरोप लगाया। बैज ने कहा कि भाजपा की तत्कालीन सरकार पर भी इस मामले में सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार द्वारा गठित एसआईटी को जांच से रोकने का प्रयास किया गया और सुप्रीम कोर्ट से एसआईटी के पक्ष में फैसला आने के बावजूद साय सरकार ने ढाई साल तक जांच शुरू नहीं की।
कांग्रेस ने झीरम हत्याकांड की पूरी साजिश सामने लाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी, एडीजी नक्सल और संदिग्ध आत्मसमर्पित नक्सलियों के नार्को टेस्ट की मांग भी की।
पत्रकार वार्ता में पूर्व मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, प्रभारी महामंत्री मलकित सिंह गैदू, कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला, पूर्व विधायक विकास उपाध्याय, रायपुर शहर जिला अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन सहित कांग्रेस के अन्य पदाधिकारी एवं प्रवक्ता मौजूद रहे।

