विश्वकर्मा जयंती पर CM साय ने की पूजा-अर्चना, बोले- श्रम और कौशल से बनेगा विकसित छत्तीसगढ़

रायपुर। विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गुरुवार को राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में भगवान विश्वकर्मा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और निरंतर प्रगति की कामना की।इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास, प्रेस अधिकारी आलोक सिंह सहित मुख्यमंत्री निवास के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
श्रमवीरों और कारीगरों को दी शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों, विशेषकर श्रमिकों, शिल्पकारों, कारीगरों, अभियंताओं, तकनीशियनों तथा उद्योग और निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों को विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं दीं।मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा सृजनशीलता, कौशल, कर्मनिष्ठा और उत्कृष्टता के प्रतीक हैं। उनकी आराधना ज्ञान, हुनर और परिश्रम के जरिए समाज और राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा देती है।
‘श्रम की प्रतिष्ठा और कौशल के सम्मान का पर्व’
सीएम साय ने कहा कि विश्वकर्मा जयंती केवल आस्था और परंपरा से जुड़ा पर्व नहीं है, बल्कि श्रम की प्रतिष्ठा, कौशल के सम्मान और सृजन की शक्ति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है।उन्होंने कहा कि किसी भी प्रदेश और राष्ट्र की प्रगति में श्रमिकों, कारीगरों, शिल्पकारों, तकनीशियनों और निर्माणकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। खेत-खलिहान से लेकर कारखानों और पारंपरिक शिल्प से लेकर आधुनिक तकनीक तक, कुशल हाथ विकास को आकार देते हैं।
परंपरागत कौशल और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान मेहनतकश लोगों और समृद्ध शिल्प परंपरा से रही है। प्रदेश के शिल्पकार और कारीगर पीढ़ियों से अपने हुनर के जरिए सांस्कृतिक विरासत को सहेजते आए हैं।उन्होंने कहा कि आज श्रमिक, अभियंता और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े युवा आधुनिक छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। परंपरागत कौशल और आधुनिक तकनीक का समन्वय प्रदेश के विकास को नई दिशा दे सकता है।
‘श्रम राष्ट्र निर्माण की शक्ति’
सीएम साय ने कहा कि श्रम केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि सृजन और राष्ट्र निर्माण की शक्ति है। प्रत्येक श्रमिक के परिश्रम और प्रत्येक कारीगर के हुनर का सम्मान करना सामाजिक जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा कि कौशलयुक्त और परिश्रमी मानव संसाधन के बल पर आत्मनिर्भर, आधुनिक और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने भगवान विश्वकर्मा से प्रदेश के सभी श्रमवीरों, कारीगरों, शिल्पकारों, तकनीशियनों, अभियंताओं और उद्यमियों को सफलता प्रदान करने तथा छत्तीसगढ़ को प्रगति, समृद्धि और खुशहाली के पथ पर आगे बढ़ाने की प्रार्थना की।


