
भिलाई। युवक कांग्रेस चुनाव के बाद अब आगामी नगरीय निकाय चुनाव को लेकर भिलाई की कांग्रेस राजनीति में अंदरूनी खींचतान की चर्चा तेज हो गई है। भिलाई, रिसाली और भिलाई-चरोदा नगर निगम में कांग्रेस के कई नेताओं और समर्थकों की दावेदारी सामने आने के बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव के समर्थकों के बीच राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
भिलाई नगर निगम के महापौर पद को लेकर कांग्रेस में कई नामों की चर्चा है। इनमें विधायक देवेंद्र यादव की पत्नी श्रुतिका ताम्रकार यादव और वर्तमान महापौर नीरज पाल का नाम भी संभावित दावेदारों में बताया जा रहा है।
महापौर पद को लेकर अलग-अलग समीकरणों की चर्चा
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि देवेंद्र यादव अपनी पत्नी के लिए महापौर पद की संभावनाएं तलाश रहे हैं, जबकि भूपेश बघेल खेमे से वर्तमान महापौर नीरज पाल के समर्थन की बात कही जा रही है। हालांकि, इन राजनीतिक समीकरणों को लेकर संबंधित नेताओं की ओर से कोई औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है।नीरज पाल वर्तमान में भिलाई नगर निगम के महापौर हैं। नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार उन्होंने 6 जनवरी 2022 को महापौर पद संभाला था।
भाजपा ने साधा निशाना
कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर भाजपा ने भी निशाना साधा है। भाजपा सांसद संतोष पांडेय ने आरोप लगाया कि कांग्रेस में बड़े नेताओं के बीच अपने समर्थकों को आगे बढ़ाने की होड़ रहती है और इसी वजह से पार्टी में अंदरूनी खींचतान होती है।हालांकि, यह भाजपा की राजनीतिक प्रतिक्रिया है और कांग्रेस की ओर से गुटबाजी के आरोपों को लेकर अलग-अलग नेताओं ने पूर्व में असहमति जताई है। सितंबर में पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भूपेश बघेल और देवेंद्र यादव के बीच गुटबाजी की बात को खारिज करते हुए कहा था कि दोनों नेताओं की उम्र और अनुभव अलग हैं और अलग राय को गुटबाजी नहीं कहा जा सकता।
नीरज पाल बोले- कांग्रेस लोकतांत्रिक पार्टी
वर्तमान महापौर नीरज पाल ने कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है। किसे चुनाव लड़ना है और किसे जिम्मेदारी दी जानी है, इसका फैसला पार्टी के वरिष्ठ नेता और संगठन मिलकर करते हैं।
उन्होंने कहा कि पार्टी की कोशिश योग्य प्रत्याशी को मौका देने की रहती है और प्रत्याशी तय होने के बाद सभी मिलकर उसके पक्ष में काम करते हैं।फिलहाल भिलाई नगर निगम के महापौर पद को लेकर कांग्रेस में कई नामों की चर्चा है। चुनाव कार्यक्रम और आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही दावेदारियों और राजनीतिक समीकरणों की तस्वीर साफ होगी।




