अबूझमाड़ के जाटलूर नाले पर बना झूला पुल, ITBP और ग्रामीणों की पहल से बारिश में भी नहीं कटेगा संपर्क

रायपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्र अबूझमाड़ के लोगों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। हर साल मानसून के दौरान उफान पर रहने वाला जाटलूर नाला आसपास के कई गांवों का संपर्क बाहरी दुनिया से पूरी तरह काट देता था। लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और स्थानीय ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से जाटलूर नाले पर फुट सस्पेंशन ब्रिज (झूला पुल) का निर्माण पूरा हो गया है।
इस झूला पुल का उद्घाटन दो दिन पहले आईटीबीपी सेंट्रल फ्रंटियर के महानिरीक्षक (IG) अजय पाल सिंह ने जाटलूर कैंप (COB Jatloor) में किया। पुल के शुरू होने से अब मानसून और बाढ़ के दौरान भी स्थानीय ग्रामीणों तथा सुरक्षाबलों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी।
बारिश में नहीं कटेगा गांवों का संपर्क
अबूझमाड़ का जाटलूर क्षेत्र घने जंगलों, ऊंची पहाड़ियों और दुर्गम रास्तों के लिए जाना जाता है। बारिश के मौसम में जाटलूर नाला उफान पर आ जाता है, जिससे ग्रामीणों का संपर्क बाजार, स्कूल, अस्पताल और प्रशासनिक सेवाओं से पूरी तरह टूट जाता था। कई बार लोगों को आवश्यक सामान और इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था।नए झूला पुल के निर्माण के बाद अब स्थानीय लोगों को बारिश के मौसम में भी सुरक्षित रास्ता उपलब्ध रहेगा। इससे ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी आसान होगी और आपातकालीन परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी तेज होगी।
ग्रामीणों और ITBP ने मिलकर बनाया पुल
इस पुल की खास बात यह है कि इसका निर्माण केवल सुरक्षा बलों ने नहीं, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से किया गया है। ITBP और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से तैयार यह पुल सुरक्षा बलों और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर तालमेल और विश्वास का भी प्रतीक माना जा रहा है।
सुरक्षाबलों को भी मिलेगा लाभ
यह पुल केवल ग्रामीणों के लिए ही नहीं, बल्कि इलाके में तैनात सुरक्षाबलों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा। मानसून के दौरान अभियान चलाने, राहत कार्यों और आवश्यक सामग्री के आवागमन में अब पहले की तुलना में काफी सुविधा होगी।
विकास की दिशा में अहम कदम:जाटलूर नाले पर बने इस झूला पुल को अबूझमाड़ जैसे दूरस्थ क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल ग्रामीणों का जीवन आसान होगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और प्रशासनिक सेवाओं तक उनकी पहुंच भी बेहतर होगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह पुल उनके लिए विकास और मुख्यधारा से जुड़ने का नया रास्ता साबित होगा।



