छत्तीसगढ़राजनीति

झीरम मामले में किसने क्या कहा: CM साय ने बताया न्याय की जीत, कांग्रेस ने फैसले को कहा आधा-अधूरा न्याय

रायपुर। झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में NIA कोर्ट के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और भाजपा नेताओं ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया है। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने फैसले को आधा-अधूरा न्याय बताते हुए NIA की जांच को लेकर कई सवाल उठाए हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने X पोस्ट के जरिए झीरम घाटी हमले में दोषियों को मिली सजा का स्वागत किया। उन्होंने इसे न्याय की जीत बताया और कहा कि NIA ने जांच को अंजाम तक पहुंचाया है, जिसकी सराहना की जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सशस्त्र माओवाद के चंगुल से प्रदेश को मुक्त कराने की दिशा में लगातार काम हुआ है।उन्होंने झीरम हमले में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी। साथ ही कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जनजातीय समाज की लाश पर राजनीति करने वालों के लिए यह आत्मचिंतन का अवसर है। उन्होंने आतंक को बौद्धिक और वैचारिक समर्थन देने वालों को भी चेताया।

डिप्टी CM अरुण साव ने क्या कहा?

डिप्टी मुख्यमंत्री अरुण साव ने NIA कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि NIA की जांच सही दिशा में हुई और अदालत का फैसला ऐतिहासिक है।

भाजपा सांसद संतोष पांडे का कांग्रेस पर निशाना

भाजपा सांसद संतोष पांडे ने फैसले को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस को अदालत के फैसले पर आपत्ति है तो वह इसे न्यायालय में चुनौती दे सकती है।

उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि यदि उनके पास कोई सबूत थे तो उन्हें अदालत के सामने क्यों नहीं रखा गया। संतोष पांडे ने कहा कि देश लंबे समय से इस फैसले का इंतजार कर रहा था।

कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने क्या कहा?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने NIA कोर्ट के फैसले को “आधा-अधूरा न्याय” बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अदालत के फैसले का सम्मान करती है, लेकिन पार्टी अपनी इस राय पर कायम है कि झीरम हमले की पूरी साजिश का खुलासा अभी नहीं हुआ है।बैज ने आरोप लगाया कि NIA की जांच घटना के कथित बड़े षड्यंत्रकारियों तक नहीं पहुंची। उनका कहना है कि जिन लोगों को सजा मिली, वे बड़े नक्सली नेताओं के बजाय छोटे स्तर के आरोपी हैं।

NIA की जांच पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

दीपक बैज ने दावा किया कि शुरुआती जांच में कई बड़े नक्सली नेताओं के नाम सामने आए थे, लेकिन बाद की चार्जशीट में उनके नाम नहीं रहे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि शुरुआती जांच में बड़ी संख्या में नक्सलियों की संलिप्तता सामने आई थी तो आरोप और सजा सीमित लोगों तक क्यों रह गई।कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि जिन कथित नक्सली नेताओं ने बाद में आत्मसमर्पण किया, उनसे झीरम मामले में पूछताछ हुई या नहीं।

कांग्रेस ने SIT को लेकर भी उठाया सवाल

दीपक बैज ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ सरकार की SIT की जांच को आगे नहीं बढ़ने दिया गया। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, मुख्य सचिव, DGP, ADG नक्सल और कुछ संदिग्ध आत्मसमर्पित नक्सलियों के नार्को टेस्ट की मांग भी उठाई।कांग्रेस का दावा—“झीरम का पूरा सच सामने नहीं आया”कांग्रेस ने कहा कि झीरम हमले में घायल और जीवित बचे लोगों के बयान, घटनास्थल से मिले दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों की जांच को लेकर भी सवाल हैं। पार्टी का आरोप है कि हमले के राजनीतिक षड्यंत्र वाले पहलू की पर्याप्त जांच नहीं हुई।

कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा झीरम मामले का पूरा सच सामने नहीं आने देना चाहती। हालांकि ये कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर भाजपा की ओर से अलग-अलग मौकों पर जवाब दिए जाते रहे हैं।

झीरम मामले पर अब सियासी घमासान:NIA कोर्ट के फैसले के बाद एक ओर भाजपा इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस फैसले के बावजूद झीरम हमले की कथित व्यापक साजिश की जांच को लेकर सवाल उठा रही है। दोनों दलों के बयानों में मुख्य अंतर यही है कि भाजपा अदालत के फैसले और NIA की जांच को महत्वपूर्ण मान रही है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि घटना के पीछे कथित बड़े षड्यंत्रकारियों की भूमिका की जांच अभी बाकी है।

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CG Bulletin Desk1

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